सूचना का अधिकार अधिनियम के 21वर्ष पूर्ण होने पर  एस.एम.जे. एन.पी.जी. कॉलेज में वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित ,सी डी ओ डॉ ललित नारायण मिश्रा ने मुख्य अतिथि के तौर पर प्रतिभाग किया।

शिक्षा हरिद्वार

आरटीआई अधिनियम व्यक्तिगत हित के साथ साथ जनहित में भी कारगर: डॉ. ललित नारायण मिश्र
एस.एम.जे.एन. पी.जी. कॉलेज में ‘सूचना का अधिकार अधिनियम के 21 वर्ष: सुधार या सुदृढ़ कार्यान्वयन’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता ।

सूचना का अधिकार अधिनियम के 21 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एस.एम.जे.एन. (पी.जी.) कॉलेज, हरिद्वार में आज ‘सूचना का अधिकार अधिनियम के 21 वर्ष: सुधार या सुदृढ़ कार्यान्वयन’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अधिनियम की उपलब्धियों, वर्तमान चुनौतियों, व्यावहारिक समस्याओं तथा इसके भविष्य को लेकर पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार और तर्क प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी, हरिद्वार डॉ. ललित नारायण मिश्र, विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश के प्रसिद्ध  व्यवसायी रवि  बजाज तथा तथा रजनी केयर फाउंडेशन की श्रीमती प्रिया बजाज उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम ने नागरिकों को शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली से संबंधित सूचनाओं तक पहुँच का महत्वपूर्ण कानूनी माध्यम उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि अधिनियम के 21 वर्षों का मूल्यांकन करते समय इसकी उपलब्धियों के साथ-साथ इसके क्रियान्वयन में सामने आने वाली चुनौतियों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे विधिक एवं संवैधानिक विषयों पर चर्चा करते समय तथ्यों, तर्कों और संवैधानिक मूल्यों को आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझने और जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका पहचानने का अवसर प्रदान करती हैं।

इस अवसर पर वर्ष 2009 में राष्ट्रीय आरटीआई पुरस्कार में ‘जन सूचना अधिकारी’ की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले मुख्य अतिथि डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम शासन व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी को सशक्त करने वाला महत्वपूर्ण कानून है। उन्होंने कहा कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त सूचना का उपयोग केवल व्यक्तिगत हित के लिए ही नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े विषयों को समझने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा अपने अध्ययन के साथ-साथ सामाजिक एवं राष्ट्रीय विषयों के प्रति संवेदनशील रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विषय की गंभीरता को समझते हुए प्रभावी ढंग से अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विद्यार्थियों की तैयारी, अभिव्यक्ति और विषय की समझ की सराहना करते हुए महाविद्यालय परिवार को इस आयोजन के लिए बधाई दी।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रदेश के प्रसिद्ध व्यवसायी रवि बजाज ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों और संस्थाओं के बीच विश्वास तथा संवाद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार नागरिकों को शासन व्यवस्था को समझने और सार्वजनिक कार्यों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने का अवसर देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों के साथ-साथ उनसे जुड़े दायित्वों और निर्धारित प्रक्रियाओं को भी समझें तथा विधिसम्मत तरीके से अपने अधिकारों का प्रयोग करें।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि श्रीमती प्रिया बजाज, रजनी केयर फाउंडेशन, ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम ने आम नागरिक को शासन से संबंधित सूचनाओं के संबंध में प्रश्न पूछने का एक प्रभावी माध्यम दिया है। उन्होंने विशेष रूप से युवा वर्ग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों को आरटीआई जैसे कानूनों की जानकारी अपने शैक्षणिक जीवन तक सीमित न रखते हुए सामाजिक सरोकारों से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं द्वारा तथ्यपरक जानकारी प्राप्त कर सामाजिक विषयों पर संवाद करना समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने इस प्रकार के आयोजन के लिए महाविद्यालय परिवार को बधाई दी।

वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विषय के पक्ष एवं विपक्ष में प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम ने प्रशासनिक पारदर्शिता, नागरिक सशक्तिकरण तथा सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं, कुछ प्रतिभागियों ने अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों, सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया, जनसूचना अधिकारियों के दायित्व तथा सूचना प्राप्त करने में लगने वाले समय जैसे विषयों को उठाया। प्रतिभागियों ने बदलते डिजिटल परिवेश का भी उल्लेख करते हुए कहा कि आज सरकारी सूचनाओं की उपलब्धता और नागरिकों की सूचना तक पहुँच के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन आया है। उन्होंने सुझाव दिया कि आरटीआई की मूल भावना को बनाए रखते हुए डिजिटल माध्यमों के बेहतर उपयोग, स्वप्रकाशन तथा सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम संयोजक एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष विनय थपलियाल ने कहा कि विधिक एवं संवैधानिक विषयों पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को किसी विषय के विभिन्न पक्षों को समझने, तर्क प्रस्तुत करने और अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि आरटीआई जैसे विषयों पर अकादमिक संवाद विद्यार्थियों को संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ने में सहायक है।

वाद विवाद प्रतियोगिता में बीएससी की छात्रा अंशिका ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। बी ए की छात्रा प्रिन्सी राजपूत ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। जबकि बीएससी की छात्रा खुशबू मौर्य तथा बी ए की छात्रा अज़रा ने संयुक्त रूप से तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। वाद विवाद प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका का निर्वहन डॉ लता शर्मा, डॉ सरोज शर्मा, डॉ मोना शर्मा ने किया। जबकि संयोजक मंडल में डॉ पूर्णिमा सुंदरियाल तथा डॉ अनुरीषा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। इस अवसर पर डॉ शिव कुमार चौहान, डॉ मीनाक्षी शर्मा, डॉ विजय शर्मा, वैभव बत्रा, विनीत सक्सेना, डॉ हरीश जोशी, डॉ आशा शर्मा, डॉ रजनी सिंघल, डॉ पदमावती तनेजा, अमिता मल्होत्रा, रिंकल गोयल, कविता छाबड़ा, रिचा मिनोचा, अंकित बंसल, डॉ ज्योति चौधरी, प्रिन्स श्रोत्रिय, कार्यालय अधीक्षक मोहन चन्द्र पाण्डेय सहित अनेक छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

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