सुरेन्द्र तेशवर ,मुख्य सयोंजक
उत्तराखण्ड निकाय कर्मचारी संयुक्त मोर्चा
ने एक बयान जारी कर कहा है कि नगर निगम हरिद्वार में आऊटसोर्स के नाम पर अलग,अलग कम्पनियों में लगभग 818 पर्यावरण मित्र एवं कुछेक वाहन चालक कार्यरत हैं,इसमें स्थाई एवं संविदा और नाला गैंग के रूप में भर्ती किए गए कर्मचारी शामिल नहीं हैं। यदि उनको भी शामिल कर लिया जाए तो ये संख्या बढ़ कर एक हजार को भी पार कर जाएगी आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन हरिद्वार निगम क्षेत्र की जनता से वसूले गए टैक्स के पैसे से बांटा जाता है जबकि स्थायी कर्मचारियों का वेतन शासन से मिलने वाली ग्रांट से दिया जाता है। बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों को हरिद्वार क्षेत्र की सफाई के लिए भर्ती किया हुआ है,क्या वास्तव में इतने कर्मचारी क्षेत्रों में दिखाई देते हैं ,सफाई न होने पर बदनाम सफाई कर्मचारी या सफाई पर्यवेक्षक होता है ।इसकी बारीकी से निष्पक्ष जांच की जाए तो वास्तविकता का सही पता चल जाएगा।इतनी बड़ी संख्या में रखें हुए कर्मियों के वेतन में करोड़ो रुपये प्रति माह जाता है।जिस कारण से सेवानिवृत्त एवं मृतक कर्मचारी के परिवार के लोगों को ग्रेच्यूटी एवं लीव इन कैशमेंट का समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है,और न ही वार्डो में अपेक्षा के अनुसार विकास के कार्य ही हो पा रहे हैं।ऐसे अनेकों कर्मचारी आज भी अपने ग्रेच्यूटी,एवं अन्य देयों के भुगतान के लिए सम्बंधित दफ्तर के चक्कर लगाते देखे जा सकते हैं। मैंन पावर भर्ती प्रकरण पर संयुक्त मोर्चे के मुख्य संयोजक चौoसुरेन्द्र तेश्वर ने यह भी कहा कि जब मैं नगर निगम हरिद्वार के नगर आयुक्त महोदय से मिला और स्थानीय बेरोजगारों को रखने की मांग की तो भर्ती प्रकरण पर उन्होंने मेयर साहिबा तथा उप नगर आयुक्त से ही मिलने की बात कही।जिन बेरोजगार गरीब,विधवा के घरों में रोजी रोटी का कोई साधन नहीं वे आज तक रोजगार की तलाश में भटकते फिर रहे हैं ।श्रमिक नेता चौधरी सुरेन्द्र तेश्वर ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की है कि जिस प्रकार आपने नगर निगम हरिद्वार में भूमि घोटाले की जांच कराई है यदि इसी तरह नगर निगम हरिद्वार में आउटसोर्स मे भर्ती प्रकरण की जाँच भी हो जाए तो वास्तविकता सामने आ जाएगी तथा निगम बोर्ड फंड के नाम पर खर्चे पर अंकुश भी लग पाएगा।

