ओकलैंड विश्वविद्यालय, अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय प्रोफेसर प्रो. राजीव सिंघल ने दून विश्वविद्यालय में एआई आधारित प्रबंधन शिक्षा एवं बिजनेस एनालिटिक्स के महत्व को रेखांकित किया

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दून विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट द्वारा नवप्रवेशित एमबीए विद्यार्थियों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम में अमेरिका के प्रतिष्ठित ओकलैंड विश्वविद्यालय, मिशिगन के एसोसिएट डीन एवं प्रोफेसर ऑफ फाइनेंस तथा दून विश्वविद्यालय के एडजंक्ट फैकल्टी प्रो. राजीव सिंघल ने मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। प्रो. सिंघल वर्तमान में ओकलैंड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में एसोसिएट डीन एवं प्रोफेसर ऑफ फाइनेंस के रूप में कार्यरत हैं तथा वित्त, कॉर्पोरेट गवर्नेंस एवं निवेश के क्षेत्र में उनका व्यापक शिक्षण एवं शोध अनुभव है।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो. गजेन्द्र सिंह द्वारा प्रो. राजीव सिंघल के स्वागत एवं परिचय के साथ हुआ। अपने स्वागत उद्बोधन में प्रो. गजेन्द्र सिंह ने कहा कि दून विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि प्रो. राजीव सिंघल जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिक्षाविद् विश्वविद्यालय के एडजंक्ट फैकल्टी के रूप में जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसे वैश्विक शिक्षाविदों से सीधे संवाद करने का अवसर मिलना उनके शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अपने विस्तृत व्याख्यान में प्रो. राजीव सिंघल ने कहा कि वर्तमान समय में प्रबंधन शिक्षा तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। केवल पारंपरिक प्रबंधन सिद्धांतों का ज्ञान अब पर्याप्त नहीं है, बल्कि उद्योग जगत ऐसे प्रबंधन पेशेवरों की अपेक्षा करता है जो तकनीक, डेटा और नवाचार के साथ कार्य करने में सक्षम हों। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि एमबीए केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच, निर्णय लेने की दक्षता, टीमवर्क और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई प्रत्येक उद्योग की कार्यप्रणाली का अभिन्न अंग बनने जा रहा हैं। बैंकिंग, वित्त, विपणन, मानव संसाधन, सप्लाई चेन, स्वास्थ्य, ई-कॉमर्स तथा विनिर्माण जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में डेटा आधारित निर्णय लेने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। इसलिए आज के एमबीए विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे तकनीकी दक्षता के साथ-साथ व्यावसायिक समस्याओं का समाधान डेटा आधारित विश्लेषण के माध्यम से करना सीखें।
प्रो. सिंघल ने विद्यार्थियों को बताया कि विश्वभर की अग्रणी कंपनियां ऐसे प्रबंधन स्नातकों को प्राथमिकता दे रही हैं जो डिजिटल टूल्स, एआई आधारित निर्णय प्रणाली तथा बिजनेस एनालिटिक्स की समझ रखते हों। उन्होंने कहा कि भविष्य में वही प्रबंधन पेशेवर अधिक सफल होंगे जो बदलती तकनीकों के साथ स्वयं को निरंतर अद्यतन रखते हुए सीखने की प्रक्रिया को कभी नहीं छोड़ेंगे।
उन्होंने विशेष रूप से दून विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट द्वारा उद्योग की बदलती मांग को ध्यान में रखते हुए एमबीए कार्यक्रम में “बिजनेस एनालिटिक्स” को एक नए स्पेशलाइजेशन के रूप में प्रारंभ किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय समय की आवश्यकता के अनुरूप है तथा इससे विद्यार्थियों को देश एवं विदेश की अग्रणी कंपनियों में बेहतर रोजगार एवं करियर अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि आज बिजनेस एनालिटिक्स केवल एक विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यवसायिक निर्णय की आधारशिला बन चुका है।
अपने संबोधन के दौरान प्रो. सिंघल ने यह भी उल्लेख किया कि स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने अपने पाठ्यक्रम को वर्तमान औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप एआई के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा कि वित्त बाजार और मानव संसाधन जैसे सभी प्रमुख स्पेशलाइजेशन में विश्लेषणात्मक विषयों को सम्मिलित किया गया है, जिससे विद्यार्थी प्रत्येक क्षेत्र में डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया, डिजिटल तकनीकों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक उपयोग को समझ सकें। उन्होंने इस पहल को भविष्य की प्रबंधन शिक्षा के लिए अत्यंत दूरदर्शी एवं सराहनीय बताया।
प्रो. सिंघल ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने दो वर्षीय एमबीए कार्यक्रम का अधिकतम लाभ उठाएं। उन्होंने इंटर्नशिप, उद्योग परियोजनाओं, शोध गतिविधियों, केस स्टडी, वैश्विक व्यावसायिक रुझानों तथा नई तकनीकों के अध्ययन पर विशेष बल देते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी वातावरण में केवल अंक ही नहीं, बल्कि कौशल (Skills), संचार क्षमता , समस्या समाधान तथा नेतृत्व क्षमता भी सफलता की कुंजी हैं।
उन्होंने कहा कि आज का उद्योग ऐसे प्रबंधकों की तलाश कर रहा है जो केवल निर्णय लेने वाले न हों, बल्कि परिवर्तन का नेतृत्व करने वाले हों। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे उद्यमिता, नवाचार तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को भी अपने करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं और अपने ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास में करें।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. गजेन्द्र सिंह ने कहा कि स्कूल ऑफ मैनेजमेंट का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योग की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। उन्होंने बताया कि विद्यालय निरंतर अपने पाठ्यक्रम को अद्यतन कर रहा है तथा उद्योग, शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रो. राजीव सिंघल जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के सभी संकाय सदस्यों एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशित एमबीए विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने प्रो. राजीव सिंघल से करियर, उच्च शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय अवसरों, उद्योग की अपेक्षाओं तथा प्रबंधन शिक्षा के भविष्य से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। विद्यार्थियों ने उनके व्याख्यान को अत्यंत प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक एवं भविष्य के लिए मार्गदर्शक बताया।( मनोज खन्ना)

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