पथरी थाना क्षेत्र में नाबालिग के साथ गैंगरेप की घटना का खुलासा करते हुए पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपी थाना पथरी क्षेत्र के फूलगढ़ गांव के रहने वाले हैं। गैंगरेप की घटना को अंजाम देने के बाद से आरोपी फरार चल रहे थे।

खुलासा करते हुए एसपी ग्रामीण शेखरचंद्र सुयाल ने बताया कि 12 जुलाई की रात 3 लडके सुल्तानपुर लक्सर से मोटरसाइकिल पर एक लड़की को लेकर फूलगढ के जंगल की तरफ आए।
जिनमें से दो लड़के एक लडके व लडकी को जंगल के पास छोड कर वापस सुल्तानपुर लौट गए। जंगल के पास पहले से ही शराब पी रहे 3 लडकों ने जंगल में लड़का व लड़की को देखकर फोन कर अपने 3 अन्य साथीयों को भी बुला लिया। जिसके बाद सभी लड़की व लडके के पीछे अन्दर जंगल में गए ओर 4 लड़कों ने लड़के को पकड़ कर उसके साथ मारपीट की। 2 अन्य लडके लड़की को पकड़ कर जंगल में ओर अन्दर ले गये। जहां पर मुख्य आरोपी महेश उर्फ मंत्री ने लडकी के साथ दुष्कर्म किया।जिसके बाद सभी फरार हो गये। अगले दिन 13 जुलाई को लड़की के पिता की तहरीर पर पॉक्सो व अन्य संबंधित धाराओं में मुकद्मा दर्ज किया गया।

नाबालिग से जुड़ा था, इसलिए एस एस पी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर ने घटना के खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए थानाध्यक्ष रविंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस व सीआईयू टीम का गठन किया ।पुलिस की कई टीमें फुलगढ़ और आसपास के इलाकों में संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं।

शुरुआत में आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बचते रहे, लेकिन 18 जुलाई को मुखबिर तंत्र और सटीक सुरागों के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर सभी छह नामजद और संलिप्त आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम
1. महेश उर्फ मंत्री (उम्र 29 वर्ष) – मुख्य आरोपियों में शामिल
2. मोहित कुमार (उम्र 25 वर्ष)
3. सुमित (उम्र 25 वर्ष)
4. आशु (उम्र 22 वर्ष)
5. शुभम (उम्र 22 वर्ष)
6. आकाश (उम्र 23 वर्ष)
पुलिस के अनुसार, ये सभी 6 आरोपी ग्राम फुलगढ़, थाना पथरी, जिला हरिद्वार के ही मूल निवासी हैं।
इन सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गयी तो उन्होंने घटना को अंजाम देना स्वीकार किया।
हरिद्वार पुलिस ने अपराधियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए इस मामले में नई कानूनी व्यवस्था यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की बेहद गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 115(2), 137(2), 70(2), 78(2), 65 (1) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 3(क), 4(2), (ड), (जी) और धारा 6 के तहत कानूनी शिकंजा कसा है। पुलिस द्वारा सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें माननीय न्यायालय में पेश किया जा रहा है, जहाँ से उन्हें जेल भेजने की तैयारी है।

