आयुर्वेदिक चिकित्सकों की अनदेखी कर रही सरकार
DACP, पदोन्नति, स्थायीकरण और अन्य सेवा संबंधी मामलों के समाधान की मांग; 15 जून से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी
राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखंड के मीडिया सचिव डॉ विवेक सतलेवाल ने बताया कि प्रांतीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवा संघ उत्तराखंडआह्वान पर प्रदेशभर के आयुष चिकित्साधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का आगाज कर दिया है। आंदोलन के प्रथम चरण में चिकित्साधिकारी 10 जून तक काली पट्टी बांधकर ओपीडी सेवाएं देते हुए सांकेतिक विरोध दर्ज करा रहे हैं।
संघ का आरोप है कि वर्षों से लंबित सेवा संबंधी मांगों के समाधान के लिए लगातार पत्राचार, बैठकें और आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे पूरे आयुष चिकित्सक संवर्ग में असंतोष व्याप्त है।
चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में DACP लाभ, ACP/MACP प्रकरणों का निस्तारण, विभागीय पुनर्गठन, पदोन्नति, स्थायीकरण, अध्ययन अवकाश संबंधी विसंगतियों का समाधान तथा निदेशक पद पर नियमित नियुक्ति शामिल हैं। इसके अलावा आधार आधारित बायोमेट्रिक और मोबाइल ऐप आधारित उपस्थिति व्यवस्था को लेकर भी चिकित्सकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में नेटवर्क एवं तकनीकी समस्याओं के बावजूद कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है।

आयुष चिकित्साधिकारी विषम परिस्थितियों में भी निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, लेकिन उनके सेवा हितों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। इसी कारण अब चिकित्सकों का आक्रोश आंदोलन के रूप में सामने आया है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आंदोलन की आगामी रणनीति के तहत 13 जून को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन और ओपीडी बहिष्कार किया जाएगा, जबकि 15 जून से प्रदेशव्यापी पूर्ण कार्य बहिष्कार एवं निदेशालय पर अनिश्चितकालीन धरना प्रस्तावित है।
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. नीरज कोहली और प्रांतीय महासचिव डॉ. हरदेव सिंह रावत ने कहा कि चिकित्साधिकारी संवर्ग अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगा और मांगों के समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा।

