लंबित सेवा मामलों पर फूटा आयुष चिकित्सकों का आक्रोश,राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखंड करेगा 8 जून से प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन; योग दिवस की तैयारियों पर भी पड़ सकता है असर।

उत्तराखंड समस्या स्वास्थ्य

लंबित सेवा मामलों पर फूटा आयुष चिकित्सकों का आक्रोश, 8 जून से प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन; योग दिवस की तैयारियों पर भी पड़ सकता है असर।राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखंड ने चिकित्साधिकारी संवर्ग की वर्षों से लंबित सेवा संबंधी समस्याओं के निराकरण न होने पर प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है। संघ का कहना है कि शासन एवं विभागीय अधिकारियों के समक्ष अनेक बार समस्याएं रखे जाने, पत्राचार, बैठकों एवं वार्ताओं के बावजूद आज तक कोई ठोस एवं संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे चिकित्सकों में व्यापक असंतोष व्याप्त है।


संघ के मीडिया कोर्डिनेटर डॉ० डी० सी० पसबोला द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि संघ द्वारा जारी पत्र के अनुसार आयुष विभाग में कार्यरत चिकित्साधिकारी वर्षों से विभागीय उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। संघ का आरोप है कि विभागीय निदेशक की नियुक्ति, ACP/MACP के लंबित प्रकरण, DACP लाभ, विभागीय ढांचे का पुनर्गठन, पदोन्नति के अवसरों का विस्तार, अध्ययन अवकाश संबंधी विसंगतियां, स्थायीकरण तथा आधार आधारित बायोमेट्रिक एवं मोबाइल ऐप आधारित उपस्थिति व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं लगातार लंबित पड़ी हुई हैं।


संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि चिकित्साधिकारी संवर्ग उत्तराखंड के पर्वतीय, सीमांत एवं दुर्गम क्षेत्रों में विपरीत परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है, लेकिन इसके बावजूद सेवा हितों से जुड़े मामलों की लगातार अनदेखी की जा रही है। परिणामस्वरूप चिकित्सकों में निराशा, असंतोष एवं असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है।


संघ ने विशेष रूप से वर्ष 2022 में राज्य मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत DACP लाभ का उल्लेख करते हुए कहा कि आज तक शासनादेश जारी न होने के कारण चिकित्साधिकारी संवर्ग को उसका लाभ नहीं मिल सका है। इसी प्रकार ACP/MACP से जुड़े अनेक प्रकरण वर्षों से लंबित हैं, जिससे चिकित्सकों को आर्थिक एवं सेवा संबंधी नुकसान उठाना पड़ रहा है।


संघ ने यह भी कहा है कि प्रदेश के अधिकांश आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां नेटवर्क, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा तकनीकी संसाधनों की गंभीर समस्याएं बनी रहती हैं। ऐसी परिस्थितियों में मोबाइल ऐप आधारित उपस्थिति एवं आधार आधारित बायोमेट्रिक व्यवस्था को वेतन आहरण से जोड़ना व्यावहारिक कठिनाइयों को जन्म दे रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि तकनीकी कारणों से उत्पन्न समस्याओं के लिए कर्मचारियों को उत्तरदायी ठहराना उचित नहीं है।
योग दिवस की तैयारियों पर भी पड़ सकता है प्रभाव
संघ द्वारा घोषित आंदोलन ऐसे समय में सामने आया है जब पूरे प्रदेश में 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। आयुष विभाग के चिकित्साधिकारी योग प्रशिक्षण, जनजागरूकता अभियान, योग प्रोटोकॉल अभ्यास, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यक्रम, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ समन्वय तथा जनपद स्तरीय आयोजनों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्वास्थ्य एवं योग क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि आंदोलन लंबा खिंचता है और समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं निकलता है तो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के व्यापक जनसहभागिता वाले कार्यक्रमों की तैयारियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से दूरस्थ एवं पर्वतीय जनपदों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
यह रहेगा आंदोलन का कार्यक्रम
संघ द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार—

08 जून से 10 जून 2026 तक चिकित्साधिकारी काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराते हुए ओपीडी का संचालन करेंगे।

11 एवं 12 जून 2026 को ओपीडी सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन विरोध स्वरूप आंदोलनात्मक गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

13 जून 2026 को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन एवं ओपीडी बहिष्कार किया जाएगा।

15 जून 2026 से सम्पूर्ण प्रदेश में पूर्ण कार्य बहिष्कार प्रारम्भ किया जाएगा तथा आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवा निदेशालय, देहरादून पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार एवं विभाग द्वारा समयबद्ध एवं सकारात्मक निर्णय लिए जाते हैं तो आंदोलन पर पुनर्विचार किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय से लंबित समस्याओं की अनदेखी अब चिकित्साधिकारी संवर्ग के लिए स्वीकार्य नहीं है।
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. नीरज कोहली एवं प्रांतीय महासचिव डॉ. हरदेव सिंह रावत ने शासन से चिकित्साधिकारी संवर्ग की न्यायोचित मांगों पर तत्काल निर्णय लेते हुए समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं एवं योग दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित होने से बच सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *