मैक्स हॉस्पिटल, देहरादन में सर्जरी से दुर्लभ एवं हाई रिस्क ट्यूमर के मरीज का सफल इलाज हुआ ।

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मैक्स हॉस्पिटल, देहरादन ने समय पर पहचान और चरणबद्ध सर्जरी से दुर्लभ एवं हाई रिस्क ट्यूमर के मरीज का सफल इलाज किया ।

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून के डॉ सौरभ तिवारी ने बताया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने एक 58 वर्षीय मरीज का सफल इलाज किया. जो एक दर्लभ और बेहद जटिल बीमारी से जूझ रहा था। कोटद्वार निवासी इस मरीज की जान को गंभीर खतरा था। जांच में पता चला कि उसकी गंभीर हालत का कारण मलाशय (रेक्टम) में मौजूद एक बड़ा ट्यूमर था। इसके साथ ही उसकी दाईं किडनी में भी एक अलग बड़ा ट्यूमर मौजूद था।

डॉ तिवारी ने बताया कोटद्वार के दिनेश सिंह नेगी, जो पहले से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, उन्हें लगातार बिगड़ती तबीयत के कारण लगभग 25 दिनों तक एक अन्य अस्पताल के आईसीयू में भर्ती रखा गया था। उनका ब्लड प्रेशर लगातार बहुत कम बना हुआ था, जिसके लिए उन्हें लगातार दवाइयां, नसों के जरिए तरल पदार्थ (आईवी फ्लूइड्स) और इलेक्ट्रोलाइट्स दिए जा रहे थे। कई तरह की जांचों के बावजूद उनकी बिगड़ती हालत की असली वजह सामने नहीं आ सकी। वहीं, मरीज की स्थिति बेहद गंभीर होने के कारण सर्जरी का जोखिम बहुत अधिक था, इसलिए ऑपरेशन नहीं किया गया।

बेहतर इलाज की उम्मीद में मरीज के परिजनों ने मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून के सीनियर कंसल्टेंट – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. सौरभ तिवारी से परामर्श लिया, जो जटिल कोलोरेक्टल बीमारियों के इलाज में विशेषज्ञ हैं। विस्तृत जांच के बाद डॉ. तिवारी को संदेह हुआ कि मरीज की गंभीर हालत का मुख्य कारण रेक्टम में मौजूद ट्यूमर ही है। इसके बाद विभिन्न विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर मरीज को सर्जरी के लिए तैयार करने हेतु हाई-प्रोटीन डाइट, इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करने के लिए गहन उपचार और अन्य जरूरी सहायक चिकित्सा शुरू की।


उन्होंने ट्यूमर और केंसर में अंतर बताते हुए कहा लगभग पांच दिनों तक सावधानीपूर्वक सर्जरी से पहले की तैयारी के बाद, मरीज का ऑपरेशन किया गया और रेक्टम के ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया, जबकि यह सर्जरी काफी जोखिमभरी थी। सबसे खास बात यह रही कि ऑपरेशन के सिर्फ दो से तीन दिनों के भीतर मरीज की हालत तेजी से सुधरने लगी। उनका ब्लड प्रेशर बिना अतिरिक्त दवाइयों के सामान्य हो गया, दस्त पूरी तरह बंद हो गए. इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर सामान्य हो गया और उन्हें आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। एक सप्ताह के भीतर मरीज को स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

इसके बाद अगले कुछ महीनों में पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) और बेहतर पोषण के जरिए मरीज की शारीरिक क्षमता में सुधार हुआ। पर्याप्त रूप से स्वस्थ होने के बाद उनकी दाईं किडनी में मौजूद बड़े ट्यूमर को निकालने के लिए दूसरी बड़ी सर्जरी की गई। यह ऑपरेशन भी सफल रहा। मरीज को कोई बड़ी जटिलता नहीं हुई और आठ दिनों बाद उन्हें स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। आज मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने पैतृक गांव में परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं।

इस मामले पर बात करते हुए डॉ. सौरभ तिवारी, सीनियर कंसल्टेंट – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने कहा, “यह केवल एक चुनौतीपूर्ण सर्जरी का मामला नहीं था,
बल्कि सही बीमारी की पहचान करना भी उतना ही कठिन था। मरीज की लंबे समय से बनी हुई गंभीर स्थिति का मुख्य कारण रेक्टम में मौजद ट्यूमर था और इसकी सही पहचान ही इलाज की योजना बनाने में का फैसला लिया। पहले उस समस्या का इलाज किया जिसकी वजह से मरीज की जान को सबसे ज्यादा सबसे महत्वपूर्ण साबित हई। हमने दोनों सर्जरी एक साथ करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से इलाज करने खतरा था। मरीज के स्वस्थ होकर ताकत वापस पाने के बाद किडनी के ट्यूमर की भी सफल सर्जरी की गई। समय पर सही जांच सोच-समझकर बनाई गई सर्जिकल योजना और विभिन्न विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों से बेहद गंभीर और हाई- रिस्क मरीजों का भी सफल इलाज संभव है।”

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