कुंभ 2027 के लिए निर्माण कार्य या तो समय पर पूर्ण नहीं होंगे या गुणवत्ता से समझौता होगा – डॉ अशोक गिरी।

अर्ध कुंभ 2027 प्रशासन हरिद्वार

वरिष्ठ नागरिक समाजसेवी डॉ अशोक गिरी का कहना है – मैंने सन् 1974 के पूर्ण कुम्भ का समापन देखा था। इस प्रकार यह कुम्भ मेरे जीवन का दसवाँ कुम्भ है। निर्माण कार्यों की धीमी गति आश्चर्य तथा चिन्ता का विषय बनी हुई है। या तो ये निर्धारित समय पर पूरे नहीं होंगे , यदि हुए तो कार्य की गुणवत्ता से बड़ा समझौता होगा। पूरे शहर में सीवर लाइन और पानी की लाइन का कार्य चल रहा है। हरिद्वार की जनता को पता ही नहीं है , कि यह कार्य केन्द्र सरकार, मेला प्रशासन, विकास प्राधिकरण या नगर निगम के अधीन हो रहा है। क्योंकि कोई संस्था या व्यक्ति मॉनिटरिंग करते हुए दिखाई नहीं दे रहा है।
मेला अधिकारी की नियुक्ति मई-2025 को हुई थी। मेला अधिकारी के सहयोग के लिए एक अपर मेला अधिकारी तथा एक उप मेला अधिकारी भी नियुक्त किए गए थे। एक बात अचम्भित करने योग्य है,कि जिस अधिकारी को श्रावण मेले के आयोजन का भी अनुभव नहीं है, उसे मेला अधिकारी बनाया जाना कितना उचित है?
उत्तराखण्ड शासन एवं प्रशासन प्रयागराज की तरह मेले का आयोजन करने का दावा कर रहे हैं। उसे मूर्त देना अधिकारियों की कार्यकुशलता, व्यवहारकुशलता पर निर्भर करता है। मेला प्रशासन को साधु समाज, व्यापारी वर्ग,साहित्यकार, समाज सेवक , मीडिया एवं आम जनता के मध्य सामंजस्य  स्थापित करना होगा। विशेष रूप से मेला अधिकारी को व्यवहारकुशलता का परिचय देना होगा, जिसका अभाव स्पष्ट नज़र आ रहा है।

मेला प्रशासन को इन बिन्दुओं पर विशेष ध्यान देना होगा :- मेले के अवसर पर स्थायी निर्माण कार्य अधिक (90%) होने चाहिएँ। कुम्भ के प्रतीक-चिह्न (Logo) में उत्तराखण्ड, हरिद्वार तथा कुम्भ की झलक स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए। स्मारिका सम्पादन का कार्य किसी वयोवृद्ध के स्थान पर किसी युवा या प्रौढ़ साहित्यकार को देना चाहिए ।भीड़ प्रबन्धन का हर किसी पुलिस कर्मचारी व अधिकारी को प्रक्षिक्षण देना चाहिए। बिजली-पानी की व्यवस्था को सुचारू रूप प्रदान करना चाहिए। यातायात तथा पार्किंग  व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करना चाहिए। मेले में यात्रियों की श्रद्धा को अक्षुण्ण रखना चाहिए।

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