धार्मिक आयोजनों से बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित होती है-मनोज आर्य, वरिष्ठ जेल अधीक्षक।
धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बंदियों को मिलती है अपराध से दूर रहने की प्रेरणा-पंडित अधीर कौशिक
धर्मनगरी हरिद्वार में रंगों के त्यौहार होली की धूम है। आज शनिवार को श्री अखंड परशुराम अखाड़े के संयोजन में जिला कारागार में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जेल में निरुद्ध बंदियों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। जेल प्रशासन की देखरेख और कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और होली गीतों पर बंदी जमकर झूमे। सभी ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और आपसी प्रेम, भाईचारे व सौहार्द का संदेश दिया।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य ने कहा कि बंदियों के मानसिक संतुलन को मजबूत करने के लिए कारागार में समय समय पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि होली आपसी भाईचारे, प्रेम और सौहार्द का पर्व है। ऐसे आयोजनों से बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित होती है और उनके भीतर नई ऊर्जा का संचार होता है। जेल प्रशासन का प्रयास है कि बंदी अपने अतीत की गलतियों से सीख लेकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित हों। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि वे पिछले तीन साल से जिला कारागार में त्यौहार मना रहे हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बंदियों के भीतर आत्मचिंतन की भावना जागृत होती है और वे अपराध की प्रवृत्ति से दूर रहने के लिए प्रेरित होते हैं। महामंडलेश्वर विश्वपुरी महाराज ने कहा कि रंगों का पर्व होली भेदभाव मिटाकर एक दूसरे को अपनाने की सीख देता है। कारागार जैसे स्थान पर प्रेम और सद्भाव का वातावरण बनना समाज के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि सुधार ही कारागार का मूल उद्देश्य है और ऐसे आयोजन से इसमें मदद मिलती है। इस अवसर पर पंडित पवन कृष्ण शास्त्री, ठाकुर विक्रम सिंह, जेल प्रशासन से डा.राकेश गैरोला, योगेश चंद मिश्रा, जगवत सिंह, मोहित, अनिल सिंह और मदन पाल, पंडित सचिन पैन्यूली, आशीष शर्मा, अंकुर, वैभव, शक्ति और हिमांशु उपस्थित रहे।

