सनातन ज्ञानपीठ शिव मंदिर सेक्टर 1 भेल में प्रदीप गोस्वामी महाराज ने श्री राम जानकी कथा के पांचवें दिन माता सीता के स्वयंवर की कथा सुनाई।

धार्मिक हरिद्वार

सनातन ज्ञानपीठ शिव मंदिर सेक्टर 1 भेल रानीपुर हरिद्वार प्रांगण में लगातार चली आ रही 57 वीं श्री राम जानकी कथा के पांचवें दिवस की कथा में आचार्य महंत प्रदीप गोस्वामी महाराज  ने प्रभु श्री राम और माता सीता के स्वयंवर की कथा सुनाई।श्री राम और माता सीता का विवाह प्रसंग भारतीय संस्कृति का सबसे पावन उत्सव माना जाता है।ये प्रसंग मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन का सबसे आनंदमय अध्याय है श्री राम और जानकी विवाह की कथा श्रद्धा,शक्ति और दैवीय मिलन का प्रतीक माना जाता है कथा व्यास जी ने बताया की जब मिथिला नरेश राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह हेतु एक प्रतिज्ञा की थी उनके पास भगवान शिव का दिव्य धनुष  जिसका नाम पिनाक था।राजा दशरथ जी ने घोषणा की थी कि जो भी वीर इस शिव धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी के साथ सीता जी का विवाह संपन्न होगा।स्वयंवर में रावण सहित संसार के बड़े-बड़े महारथी आए लेकिन कोई धनुष को हिला तक ना सका ये देख राजा जनक को बड़ी चिंता हुई।राजा जनक को चिंतित देख श्री राम जी अपने गुरु जी कि आज्ञा पाकर मंच से उठे।और अत्यंत सहजता से धनुष को उठाया और जैसे ही उस पर प्रत्यंचा चढ़ानी चाही, वह भयंकर गर्जना के साथ दो टुकड़ों में टूट गया।धनुष टूटने के साथ ही माता सीता ने मंद मुस्कान के साथ श्री राम को वरमाला पहनाई।और इस प्रकार राजा जनक ने अयोध्या नरेश दशरथ को संदेश भेजा, जिसके बाद सजी-धजी बारात मिथिला पहुँची। गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राम-जानकी का पाणिग्रहण संस्कार हुआ। इसी के साथ जनक जी की अन्य पुत्रियों और भतीजियों का विवाह भी श्री राम के भाइयों के साथ हुआ। लक्ष्मण का विवाह उर्मिला से, भरत का माण्डवी से और शत्रुघ्न का श्रुतकीर्ति से हुआ।
कथा व्यास जी ने बताया कि ये श्री  राम-सीता का विवाह मात्र दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि धर्म और शक्ति का संगम था। कथा व्यास जी ने बताया कि आज  का प्रसंग हमे सिखाता है कि अहंकार (बाकी राजाओं की तरह) पराजित होता है और भक्ति व विनम्रता (श्री राम की तरह) से ही ईश्वर की प्राप्ति होती है। श्री राम जी ने यह सिद्ध कर दिया कि विनम्रता से और गुरु कि आज्ञा से कठीन से कठीन लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।आज भी हम इस दिन को ‘विवाह पंचमी’ के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मानते है।अतः शिव मंदिर सेक्टर 1 मे बड़ी ही धूम-धाम और हर्षो उल्लास के साथ एकजुट होकर मनाया।
कथा मे मंदिर सचिव ब्रिजेश कुमार शर्मा और मुख्य यजमान जे.पी. अग्रवाल,मंजू अग्रवाल,पुलकित अग्रवाल,सुरभि अग्रवाल,दिलीप गुप्ता हरिनारायण त्रिपाठी,तेज प्रकाश, अनिल चौहान,मानदाता,राकेश मालवीय,रामकुमार,मोहित तिवारी, आदित्य गहलोत,ऋषि,सुनील चौहान,होशियार,जय प्रकाश,राजेंद्र प्रसाद,दिनेश उपाध्याय,रामललित गुप्ता,अवधेश पाल,रजनीश,अर्जुनचौहान,आर.सी.अग्रवाल ,शिव प्रकाश,मधु सूदन चौहान,अलका शर्मा,संतोष चौहान, पुष्पा गुप्ता,नीतू गुप्ता,अंजू पंत,अनपूर्णा,सुमन,विभा गौतम,बृजेलेश,दीपिका, कौशल्या,सरला शर्मा,राजकिशोरी मिश्रा,मनसा मिश्रा,सुनीता चौहान,बबिता,मीनाक्षीऔर अनेको श्रोता गण कथा के दौरान सम्मिलित रहे।

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