सनातन ज्ञान पीठ शिव मंदिर सेक्टर 1 भेल रानीपुर हरिद्वार प्रांगण मे लगातार चली आ रही 57 वी श्री राम जानकी कथा के प्रथम दिवस की कथा का शुभारम्भ करते हुए कथा व्यास पंडित प्रदीप गोस्वामी महाराज जी ने राम जानकी कथा का महत्व बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में राम कथा का स्थान सर्वोपरि है इसे केवल एक राजा की कहानी नहीं बल्कि जीवन जीने की कला और मानवता का संविधान माना जाता है राम कथा हमें सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने धर्म(कर्तव्य) का पालन कैसे किया जाए चाहे वह पुत्र के रूप में हो,चाहे भाई के रूप में हो,चाहे पति के रूप में हो,चाहे सेवक के रूप मे हो,चाहे मित्र के रूप मे हो और चाहे एक राजा के रूप में हो।महाराज श्री ने बताया कि भगवान राम ने अपने जीवन मे जाति और वर्ग के भेदों को केवट को गले लगा कर,शबरी के झूठे बेर खाकर और अपनी सेना में वानर और भालूओ को शामिल कर समता का परिचय दिया।ये घटनाये यह दर्शाती है कि राम कथा प्रेम और समानता का मार्ग प्रशस्त करती है।
कथा का विस्तार करते हुए कथा व्यास जी ने कहा कि यह श्री राम जानकी कथा चार प्रकार से हो रही है पहला तो भगवान शिव जी पार्वती जी को सुना रहे हैं दूसरा काक-भूसुंडी जी गरुण जी को सुना रहे हैं तीसरा महर्षि याज्ञवल्क्य जी भारद्वाज जी को सुना रहे है और चौथा तुलसीदास जी ने यह कथा अपने “स्वांतः सुखाय” (स्वयं के सुख के लिए) लिखी और अपने ही मन को संबोधित करते हुए भक्तों के कल्याण के लिए प्रस्तुत की और उनके ही माध्यम से कथा व्यास जी के मुख से हम सभी राम भक्त एक साथ शिव मंदिर सेक्टर 1 भेल के प्रांगण में सुन रहे है।काकभुशुण्डि का चरित्र हमें सिखाता है कि भक्ति के लिए रूप या जाति (पक्षी या मनुष्य) मायने नहीं रखती, केवल समर्पण और प्रेम ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग है।राम कथा परिवार के साथ सुननी चाहिए।श्री राम कथा सुनने या पढ़ने से व्यक्ति के चरित्र में निखार आता है यह धैर्य,संयम,शक्ति और त्याग जैसे मूल्यों को बढ़ावा देती है यह हमें सिखाती है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों ना हो अंत में जीत धर्म की ही होती है और व्यास जी ने कथा के अंत मे कथा का सार बताते हुए कहा कि राम कथा व्यक्ति को अहंकार से अध्यात्म की ओर और स्वार्थ से परमात्मा की और ले जाने वाली एक पावन धारा है।
कथा मे मंदिर सचिव ब्रिजेश कुमार शर्मा और मुख्य यजमान जे.बी. अग्रवाल,मंजू अग्रवाल,पुलकित अग्रवाल,सुरभि अग्रवाल,दिलीप गुप्ता हरिनारायणत्रिपाठी,तेजप्रकाश,अनिल चौहान,मानदाता,राकेश मालवीय, रामकुमार,मोहित तिवारी, आदित्य गहलोत,ऋषि,सुनील चौहान,होशियार,जय प्रकाश,राजेंद्र प्रसाद,अलका शर्मा,संतोष चौहान, अनपूर्णा,सुमन,विभा गौतम, मंजू ,बृजेलेश,दीपिका,
कौशल्या,सरला शर्मा, राजकिशोरी मिश्रा और अनेको श्रोता गण कथा के दौरान सम्मिलित रहे।

