संस्कृत‍ि स्कूल के नन्हे सितारों ने हरिद्वार में दुर्गा पूजा समारोह में बिखेरी अपनी प्रतिभा की चमक

शिक्षा संस्कृति हरिद्वार

संस्कृत‍ि स्कूल, हरिद्वार ने बीती रात बीएचईएल, हरिद्वार स्थित विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर 5ए में बंगो सांस्कृतिक मंच द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा समारोह में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
विद्यालय के सीनियर केजी एवं जूनियर केजी के नन्हे विद्यार्थियों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। सीनियर केजी के विद्यार्थियों ने माँ दुर्गा की दिव्य शक्ति और महिमा को समर्पित भक्तिमय नृत्य-नाटिका ‘नवदुर्गा दर्शन’ प्रस्तुत की, जबकि जूनियर केजी के विद्यार्थियों ने वीरता और देशभक्ति की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से प्रेरित नृत्य प्रस्तुति ‘झाँसी की रानी’ के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।


यह आयोजन बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव रहा। उन्हें एक नए मंच पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, व्यापक दर्शक वर्ग के सामने प्रस्तुति देने तथा आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर मिला।
इन प्रस्तुतियों की तैयारी श्रीमती प्रेरणा अरोड़ा एवं श्रीमती ललिता पांडेय के मार्गदर्शन में की गई। इस अवसर पर विद्यालय की निदेशक श्रीमती दिव्या पंजवानी, प्रधानाचार्या श्रीमती श्वेता सहगल, श्रीमती मेघा गौड़, श्रीमती सीमा सिंह एवं सुश्री इशिका खन्ना ने बच्चों के साथ उपस्थित रहकर उनका उत्साहवर्धन किया।


आयोजन समिति की ओर से बच्चों को स्मृति-चिह्न एवं जलपान कूपन प्रदान किए गए, जिससे उनका उत्साह और भी बढ़ा। वहीं, संस्कृत‍ि स्कूल की ओर से भी सभी प्रतिभागी बच्चों को उनकी मेहनत, उत्साह और शानदार प्रस्तुतियों के लिए उपहार भेंट किए गए।
इस सफल सहभागिता में विद्यालय के समस्त स्टाफ के सामूहिक प्रयास, समर्पण और टीम भावना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विद्यालय ने शिक्षकों के अथक परिश्रम एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया तथा बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करने के लिए आयोजकों का धन्यवाद किया।
निदेशक श्रीमती दिव्या पंजवानी एवं प्रधानाचार्या श्रीमती श्वेता सहगल ने बच्चों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन और शिक्षकों के समर्पित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, सांस्कृतिक जागरूकता और सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ और बच्चों के मन में अनेक सुखद स्मृतियाँ, उपलब्धि का भाव तथा भविष्य में नए अवसरों को अपनाने का आत्मविश्वास छोड़ गया।

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