संस्कृति स्कूल में आज बुधवार को प्राणिक हीलिंग सत्र का सफल आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों के अभिभावको और संस्कृति स्कूल के शुभचिंतको ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस सत्र का उद्देश्य मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना था।
सत्र के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि प्राणिक हीलिंग मन को शांत कर तनाव और चिंता को कम करने में सहायक होती है। यह विधि भावनात्मक संतुलन को बेहतर बनाती है और क्रोध, भय तथा बेचैनी जैसी भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद करती है। साथ ही, यह एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता को बढ़ाती है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों में सुधार होता है।

श्रीमति विजय लक्ष्मी परिहार और उनकी टीम (डॉ. प्रियंका, मिस पूजा, मिस मानसी ) ने बताया कि प्राणिक हीलिंग आंतरिक शांति और सकारात्मकता को बढ़ाकर समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान कर, अन्य उपचारों के साथ मिलकर तेजी से रिकवरी में सहायक होती है। इसके अतिरिक्त, यह लोगों के बीच सामंजस्य और सकारात्मक संबंध बनाने में भी मदद करती है तथा बेहतर नींद और विश्रांति को प्रोत्साहित करती है।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमति श्वेता सहगल ने इस अवसर पर कहा, “हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है। प्राणिक हीलिंग जैसे सत्र बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इससे उन्हें सकारात्मक सोच विकसित करने और जीवन की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना करने की प्रेरणा मिलती है।”
विद्यालय की डायरेक्टर श्रीमति दिव्या पंजवानी ने कहा, “आज के प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में बच्चों का मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत होना बहुत आवश्यक है। प्राणिक हीलिंग सत्र उन्हें तनावमुक्त रहने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने में मदद करता है। हम भविष्य में भी ऐसे सत्रों का आयोजन करते रहेंगे।”
इस सफल आयोजन ने यह सिद्ध किया कि प्राणिक हीलिंग न केवल एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है, बल्कि एक स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का प्रभावी माध्यम भी है।

