SPECS द्वारा DWT College में  प्राकृतिक एवं हर्बल रंग बनाने की कार्यशाला में होली के अवसर पर क्या करें और क्या नहीं करें बताया गया।

Dehradun पर्व, त्यौहार और मेले स्वास्थ्य

सामाजिक और वैज्ञानिक संस्था SPECS द्वारा DWT College देहरादून में होली के अवसर पर प्राकृतिक एवं हर्बल रंग बनाने की कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य जनसामान्य एवं विद्यार्थियों को रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों से अवगत कराना तथा घर पर सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल रंग बनाने की विधियों के बारे में जागरूक करना था। कार्यशाला का संचालन स्पेक्स के सचिव एवं प्रसिद्ध विज्ञान संचारक डॉ बृजमोहन शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया।कार्यशाला में विद्यार्थियों को मेहंदी, हल्दी, चुकंदर, टेसू (पलाश) के फूल, गुड़हल, गेंदे के फूल, अनार के छिलके तथा अन्य प्राकृतिक स्रोतों से सुरक्षित एवं त्वचा के लिए लाभकारी रंग बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुरक्षा तथा पारंपरिक भारतीय ज्ञान की महत्ता पर भी प्रकाश डाला गया।इस अवसर पर  राम तीर्थ मौर्य, डॉ आरती दिक्षित तथा डॉ सुहासिनी भी उपस्थित रहे। उन्होंने SPECS द्वारा आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी तथा सुरक्षित जीवनशैली के प्रति जागरूकता विकसित करती हैं।SPECS द्वारा इस अवसर पर सुरक्षित होली मनाने हेतु क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts) संबंधी जन-जागरूकता संदेश भी जारी किया गया।


सुरक्षित होली के लिए क्या करें (Do’s):
होली खेलने से पहले शरीर एवं बालों में नारियल तेल या क्रीम लगाएँ, जिससे रसायनों का त्वचा पर प्रभाव कम हो।

बालों में तेल लगाएँ तथा होंठों पर वैसलीन लगाएँ।

पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें जैसे फुल स्लीव शर्ट, मोजे आदि।

धूप और रंगों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सनस्क्रीन और चश्मे का उपयोग करें।

आँखों में रंग जाने पर तुरंत साफ पानी से धोएँ।

केवल हर्बल और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें।

रंग हटाने के लिए पहले सूखे हाथ से साफ करें, फिर गुनगुने पानी और हल्के साबुन से स्नान करें।

स्नान के बाद मॉइस्चराइज़र अवश्य लगाएँ।

सुरक्षित होली के लिए क्या न करें (Don’ts):
रासायनिक और सिंथेटिक रंगों का प्रयोग न करें।

बच्चों और शिशुओं को जहरीले रंगों से दूर रखें।

आँख, नाक, कान या घावों के पास रंग न लगाएँ।

मिट्टी, गंदगी या हानिकारक पदार्थों का उपयोग न करें।

रंगों को सांस के माध्यम से अंदर जाने से बचाएँ।

नशे की स्थिति में वाहन न चलाएँ।
होली से पहले त्वचा संबंधी उपचार (फेशियल, वैक्सिंग आदि) से बचें।
डॉ. शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक रंग न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी पूर्णतः अनुकूल हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे पर्यावरण-अनुकूल एवं सुरक्षित होली मनाकर प्रकृति के संरक्षण में योगदान दें।
SPECS ने इस अवसर पर सभी से “स्वस्थ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल होली” मनाने का संदेश दिया।

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