शिवरात्रि पर्व और शारदीय कांवड़ यात्रा संपन्न के साथ ही हरिद्वार में हुआ मंदी का दौर शुरू, रही सही कसर टूटी सड़कें पूरा कर रही हैं।

व्यापार समस्या हरिद्वार

शारदीय कांवड़ यात्रा और शिवरात्रि का पर्व संपन्न होने के बाद हरिद्वार में फिर से मंदी का दौर शुरू हो गया है। एक तो यात्री बहुत काम आ रहे हैं ऊपर से हरिद्वार में सीवर कार्यों के चलते कई स्थानों पर सड़क टूटी हुई है जिसके चलते आने वाले यात्री बाहर से ही गाड़ी पार्क करके गंगा स्नान कर वापस जा रहे हैं, उत्तरी हरिद्वार में तो सड़कों का और भी बुरा हाल है अगर एक बार गाड़ी हाईवे से नीचे ले आते हैं तो वापस हाईवे पर जाने के लिए लंबी दूरी तक भटकना पड़ता है इसलिए यात्री हाईवे से नीचे उतरने से पहले सौ बार सोचता है । इस लिए इस क्षेत्र में होटल धर्मशालाएं और रेस्टोरेंट यात्री विहीन हैं।अपर रोड, मोती बाजार और अन्य बाजारों में दुकानदार ग्राहकों के लिए तरस रहे हैं। मंदी का सामना कर रहे हरिद्वार के व्यापारी अब होली के बाद गर्मी के सीजन और चार धाम यात्रा से अच्छा कारोबार चलने का इंतजार कर रहे हैं। शारदीय कांवड़ यात्रा के बाद बोर्ड परीक्षा और कोई बड़ा स्नान पर्व नहीं होने के चलते हरिद्वार में श्रद्धालुओं की आवाजाही कम हो जाती है। ऐसे में यात्रा कारोबार पर निर्भर रहने वाला व्यापार मंद पड़ जाता है। इन दिनों हरिद्वार के होटल, रेस्टोरेंट और धर्मशालाएं भी यात्री विहीन दिख रहे हैं। अप्रैल में बैशाखी स्नान से हरिद्वार के बाजारों में यात्रीयों और श्रद्धालुओं की चहल पहल एक बार फिर शुरू हो जाएगी और बाजारों में छाया सन्नाटा दूर हो जाएगा। वहीं टूटी-फूटी सड़कों को देखकर व्यापारी आशंकित हैं कि इनके चलते कहीं सीजन का बंटाधार ना हो जाए।
दरअसल हरिद्वार का पूरा व्यापार गर्मी के सीजन और चारधाम यात्रा पर निर्भर है। गर्मी के सीजन और चारधाम यात्रा के दौरान पड़ने वाले स्नान पर्वों और कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार में जमकर व्यापार होता है। कांवड़ मेले के बाद बंगाली सीजन और गुजराती सीजन के चलते यात्रीयों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। दीपावली के बाद कार्तिक पूर्णिमा स्नान संपन्न होने के बाद यात्रीयों की संख्या घटने लगती है। इसके बाद शारदीय कांवड़ यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं से हरिद्वार में एक बार फिर चहल पहल बढ़ जाती है।

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