57 वीं श्री राम जानकी कथा के नवम दिवस में कथा व्यास आचार्य महंत प्रदीप गोस्वामी महाराज  ने सुन्दरकाण्ड की महिमा का वर्णन किया।

धार्मिक हरिद्वार

सनातन ज्ञानपीठ शिव मंदिर सेक्टर 1 भेल् रानीपुर हरिद्वार प्रांगण मे लगातार चली आ रही 57 वीं श्री राम जानकी कथा के नवम दिवस की कथा में आचार्य महंत प्रदीप गोस्वामी महाराज ने किष्किंधा कांड प्रसंग के बाद श्री राम और शबरी के मिलन की कथा, सुन्दरकाण्ड और अंगद-रावण सावंद  की कथा का वर्णन करा। कथा व्यास जी ने बताया श्री राम और शबरी के मिलन की कथा रामायण का सबसे हृदयस्पर्शी प्रसंग है, जो यह सिखाता है कि भगवान जाति या कुल नहीं, केवल प्रेम और भक्ति के भूखे हैं।शबरी मतंग ऋषि की शिष्या थी। ऋषि ने प्राण त्यागते समय कहा था कि एक दिन भगवान राम स्वयं तुम्हारी कुटिया में आएंगे। इसी विश्वास के साथ शबरी वृद्ध होने तक रोज अपनी कुटिया की सफाई करती और रास्ते में फूल बिछाती थी।भगवान राम शबरी की वर्षों की प्रतीक्षा और भक्ति देखकर उसकी कुटिया में स्वयं पधारे।शबरी ने भाव-विभोर होकर प्रभु को चख-चखकर मीठे जूठे बेर खिलाए, ताकि प्रभु को कोई खट्टा बेर न मिले। श्रीराम ने उसके प्रेम और निष्कपट भक्ति को स्वीकार कर उसे ‘नवधा भक्ति’ का उपदेश दिया और मोक्ष प्रदान किया।तत्पश्चात कथा व्यास जी  ने बताया की सुंदरकांड रामचरितमानस का वह अध्याय है जहाँ से श्री राम की विजय गाथा प्रारंभ होती है। इसमें हनुमान जी के पराक्रम, बुद्धि और अटूट भक्ति का अद्भुत वर्णन है।सुंदरकांड हनुमान जी की शक्ति और भक्ति की कथा है। जामवंत के जगाने पर हनुमान जी समुद्र लांघकर लंका पहुँचे, मार्ग की बाधाएं पार कीं और विभीषण से मिले। अशोक वाटिका में माता सीता को प्रभु की मुद्रिका दी, रावण को उपदेश दिया और लंका दहन कर वापस लौटे। यह अध्याय विजय और आत्मविश्वास का प्रतीक है।अंगद, प्रभु श्री राम के दूत बनकर शांति प्रस्ताव लेकर रावण की सभा में गए। रावण के न मानने पर अंगद ने अपना पैर सभा में जमा दिया और चुनौती दी कि यदि कोई पैर हिला दे, तो श्री राम हार मान लेंगे। कोई योद्धा पैर नहीं हिला सका। यह कथा अंगद के अटूट आत्मविश्वास और पराक्रम को दर्शाता है।
कथा मे मंदिर सचिव ब्रिजेश कुमार शर्मा और मुख्य यजमान जे.पी. अग्रवाल,मंजू अग्रवाल,पुलकित अग्रवाल,सुरभि अग्रवाल,दिलीप गुप्ता हरिनारायण त्रिपाठी,तेज प्रकाश, अनिल चौहान,मानदाता,राकेश मालवीय,रामकुमार,मोहित तिवारी, आदित्य गहलोत,ऋषि,सुनील चौहान,होशियार,जय प्रकाश,राजेंद्र प्रसाद,दिनेश उपाध्याय,रामललित गुप्ता,अवधेश पाल,शरद,रजनीश, आर.सी.अग्रवाल,अलका शर्मा,संतोष चौहान,पुष्पा गुप्ता,नीतू गुप्ता,अंजू पंत,सुमन, अनपूर्णा,गौतम गौतम, बृजेलेश,दीपिका,कौशल्या,सरला शर्मा,राजकिशोरी मिश्रा,मनसा मिश्रा, सुनीता चौहान,बबिता,मीनाक्षी,शालू पांडे और अनेको श्रोता गण कथा के दौरान सम्मिलित रहे।

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