धर्मनगरी हरिद्वार में कल रात 4 नवंबर को देव दीपावली मनाई गई. इस दौरान हरकी पैड़ी समेत हरिद्वार के तमाम गंगा घाटों पर दीपदान किया गया। हरकी पैड़ी पर गंगा सभा द्वारा हजारों दीप प्रज्वलित किएगए ।गंगा सभा के अलावा अन्य श्रद्धालुओं ने भी दीप प्रज्वलित किए. हरकी पैड़ी पर दीयों के प्रकाश देख ऐसा लगा रहा था जैसा बैकुंठ धाम यहीं पर उतर आया हो।
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम, महामंत्री तन्मय वशिष्ठ और गंगा सभा के विभिन्न पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन के साथ आतिशबाजी भी की. नितिन गौतम ने बताया कि आज वैकुंठ चर्तुदशी के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस के तीनों पुत्रों को वध किया था. तीनों के वध के बाद राक्षसों के भय से नदी और सरोवरों के छिपे सभी देवी और देवता मुक्त गए थे. तभी देवी देवतायों ने भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए नदियों और सरोवरों के किनारे दीपदान किया था और देव दीपावली मनाई थी.
श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि पिछले कई सालों से देव दीपावली का कार्यक्रम मनाया जा रहा है. देव दीपावली के पर्व में देश-दुनिया से हरिद्वार हरकी पैड़ी पर आए श्रद्धालु शामिल हुए है. बड़े मनोभाव से हरकी पैड़ी क्षेत्र में दीपक की श्रृंखला बनाई गई.हरिद्वार में कल कार्तिक पूर्णिमा के दिन नहीं बल्कि आज देव दीपावली मनाई जा रही है. इसका कारण है कल गंगा स्नान के लिए होने वाली भीड़ को देखते हुए गंगा सभा और प्रशासन ने ये फैसला लिया है कि आज गंगा घाट पर हर साल की तरह देवदीपवाली मनाई जाएगी. मान्यता है कि देव दीपावली के दिन देवता दिवाली मनाते हैं. पुराणों के अनुसार देव दिवाली के दिन ही भगवान विष्णु को बलीराजा से मुक्ति मिली थी, इसी दिन वो स्वर्ग पधारे थे. जिसके बाद सारे देवताओं ने दीप जलाकर खुशियां मनाई. इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिरों में देव दिवाली मनाई जाती है. देवताओं द्वारा मनाई जाने वाली दीवाली धरती को ऊर्जा देती है. कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर हरकीपैड़ी, ब्रह्मकुंड पर भी ये दीपावली हर साल बेहद बड़े स्तर पर मनाई जाती है. साथ ही आतिशबाजी से भी माहौल भक्तिमय हो जाता है. श्रीगंगा सभा के सचिव की मानें तो इस दिन देवताओं के निमित्त दीपदान का आध्यात्मिक महत्व है.देव दिवाली के दिन देवताओं के लिए दीपदान किया जाता है. उससे हमारे जीवन में आजीवन उजाला रहता है. क्योंकि दीप प्रकाश का प्रतीक है, यह परंपरा अनादि काल से चली आ रही है. कल गंगा स्नान होने की वजह से वैकुंठ चतुर्दशी को ये कार्यक्रम किया जा रहा है।



