उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल ही में जारी स्थानान्तरण आदेशों को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं। प्रारंभिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन आदेशों की उत्तराखण्ड लोक सेवकों हेतु वार्षिक स्थानान्तरण अधिनियम, 2017 तथा शासनादेश दिनांक 28 जून 2024 के प्रावधानों के अनुरूप समीक्षा कराने की मांग की गई है।
प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के प्रदेश महासचिव डॉ यशपाल तोमर ने बताया कि स्थानान्तरण प्रक्रिया में लगभग 25 वरिष्ठ कार्मिक, करीब 30 गंभीर बीमारियों से प्रभावित चिकित्सक, लगभग 10 ऐसे चिकित्सक जिनके बच्चे विशेष आवश्यकता (दिव्यांगता) की श्रेणी में हैं तथा लगभग 17 दम्पत्ति पदस्थापन से जुड़े प्रकरण प्रभावित हुए हैं। संबंधित पक्षों का कहना है कि इन मामलों में अधिनियम में उपलब्ध प्रावधानों एवं मानवीय पहलुओं पर अपेक्षित विचार नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि अनेक स्थानान्तरण आदेशों में उत्तराखण्ड वार्षिक स्थानान्तरण अधिनियम, 2017 की धारा 26 अथवा संबंधित वैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। वरिष्ठता क्रम, दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों के स्थानान्तरण, प्रतिनियुक्ति से जुड़े मामलों तथा विशेषज्ञता आधारित पदस्थापन को लेकर भी प्रश्न उठाए गए हैं।
डॉ तोमर ने कहा कि महानिदेशक कार्यालय एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में कार्यरत अनुभवी चिकित्सकों के स्थानान्तरण से विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निरंतरता तथा स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन पर प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में स्थानान्तरण केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि इसका सीधा संबंध मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता तथा जनहित से भी है।
प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के चिकित्सकों ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि हाल ही में जारी स्थानान्तरण आदेशों की उत्तराखण्ड लोक सेवकों हेतु वार्षिक स्थानान्तरण अधिनियम, 2017 एवं शासनादेश दिनांक 28 जून 2024 के अनुरूप निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। साथ ही, जहाँ भी नियमों से विचलन पाया जाए, वहाँ आवश्यक संशोधन अथवा अन्य उपयुक्त कार्रवाई पर विचार किया जाए।

